हमारा शरीर एक स्मार्ट सिस्टम है जो लगातार हमें हमारी दिनचर्या, खान-पान और आराम के बारे में प्रतिक्रिया (feedback) देता है। आइए इन सामान्य संकेतों को पहचानें।
यह सूची कोई डायग्नोस्टिक टेस्ट या बीमारी मापने का तरीका नहीं है। यह सिर्फ विचार करने के लिए है कि आप दिनभर में कैसा महसूस करते हैं। अपने आपसे ये शैक्षिक प्रश्न पूछें:
क्या लंच करने के कुछ देर बाद आपको ऑफिस में काम करते हुए बहुत अधिक नींद या सुस्ती का अनुभव होता है, जिससे ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाता है?
क्या शाम के 4-5 बजे के आसपास आपको अचानक कुछ बहुत मीठा (meetha snack) खाने या कड़क चाय-कॉफी की तलब लगती है?
क्या ऑफिस मीटिंग्स या ट्रैफिक के कारण खाना खाने में देरी होने पर आप स्वभाव में अचानक बदलाव या गुस्सा महसूस करते हैं?
क्या दिन के किसी खास समय आपकी शारीरिक ऊर्जा एकदम से कम हो जाती है, भले ही आपने कोई बहुत भारी शारीरिक काम न किया हो?
क्या रात में 7-8 घंटे बिस्तर पर बिताने के बाद भी सुबह उठते ही आपको थकान महसूस होती है?
भारत में हमारा रूटीन काफी मांग वाला होता है। सुबह जल्दी उठकर ऑफिस के लिए निकलना, लोकल ट्रेन या भारी ट्रैफिक में सफर करना (long commute) हमारी काफी ऊर्जा खर्च कर देता है।
काम के बीच बार-बार चाय पीना और बिस्कुट या नमकीन खाना बहुत आम बात है। ये आदतें हमें कुछ समय के लिए ऊर्जा तो देती हैं, लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि कुछ घंटों बाद अचानक थकान क्यों महसूस होती है? यह सब अनियमित दिनचर्या का हिस्सा है।
शहर के ट्रैफिक या भीड़-भाड़ वाले सफर में घंटों बिताना थका देने वाला होता है। इस दौरान हम अक्सर पानी पीना भूल जाते हैं (dehydration), जो सीधे तौर पर हमारी ऊर्जा को कम करता है।
रात के भोजन के बाद टीवी या मोबाइल देखते हुए चिप्स या मीठा खाते रहना हमारे शरीर को आराम करने से रोकता है, जिसका असर अगले दिन की ताजगी पर पड़ता है।
गर्मियों (hot weather) में बाहर की चिलचिलाती धूप और ऑफिस के ठंडे AC के बीच बार-बार आना-जाना हमारे शरीर को भ्रमित करता है और शारीरिक थकान को बढ़ाता है।
सुबह की जल्दीबाजी में नाश्ता छोड़ देना शरीर को शुरुआती ईंधन से वंचित कर देता है, जिससे दोपहर तक भारी थकावट महसूस होने लगती है।